एफएटीएफ की ब्लैकलिस्ट में आने से पाकिस्तान आखिर कैसे बचा ?
एफएटीएफ की ब्लैकलिस्ट : आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान अपने आतंकियों के संगठनों की फाइनेंशियल फंडिंग को बचाए रखने में फिलहाल कामयाब हो चुका है|
दरअसल वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स जो आतंकी संगठनों के वित्तपोषण पर निगरानी रखती है उसके तीन सदस्यों चीन, तुर्की और मलेशिया का साथ पाकिस्तान को मिल गया है| जिसके बाद वह संस्थान की ब्लैक लिस्ट में शामिल होने से बच गया है लेकिन अभी भी उसके ऊपर संकट बरकरार है|
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एफएटीएफ की ब्लैकलिस्ट से बचने का एलान इस दिनांक को
एफएटीएफ की ओर से अभी कोई भी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है| वर्ल्ड मीडिया सूत्रों के मुताबिक संस्था 13 से 18 अक्टूबर के बीच पेरिस में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट नहीं किए जाने की औपचारिक घोषणा करेगा|
एफएटीएफ चार्टर के तहत ब्लैक लिस्ट होने से बचने के लिए कम से कम 3 सदस्य देशों का समर्थन मिलना जरूरी है जो कि पाक को मिल चुका है| तुर्की एकमात्र ऐसा देश था जो अमेरिका और ब्रिटेन के समर्थन से भारत के लाये इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध कर रहा था|
एशिया पेसिफिक ग्रुप के संयुक्त समूह का सदस्य देश भारत चाहता था कि पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में शामिल किया जाए क्योंकि अब तक पाकिस्तान वित्तीय अपराध और आतंकी संगठनों की फंडिंग रोकने में असफल रहा है| भारत पर किये गए तमाम आतंकी हमलों के पीछे उसी का हाथ हर बार सामने आया है|
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने मीडिया सूत्रों से मिली इस खबर पर टिप्पणी करने से तो मना कर दिया लेकिन कहा कि वह फैसले का इंतजार करेंगे|
याद दिला दें कि 2018 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को अपनी ग्रे सूची में डाल दिया था| इसके साथ ही आतंकी संगठनों की फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था ने इस्लामाबाद को 27 पॉइंट का एक्शन प्लान दिया था , जिस पर कोई भी ठोस कार्रवाई तमाम सरकारों ने नहीं की|
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Web Journalist
Ex- Punjab Kesari, Bihar Express, Unacademy

